श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 169: भगवान‍् श्री कृष्णकी महिमाका वर्णन और भीष्मजीका युधिष्ठिरको राज्य करनेके लिये आदेश देना  »  श्लोक 56
 
 
श्लोक  13.169.56 
त्रियुगौ पुण्डरीकाक्षौ वासुदेवधनञ्जयौ।
विदितौ नारदादेतौ मम व्यासाच्च पार्थिव॥ ५६॥
 
 
अनुवाद
पृथ्वीनाथ! कमलनयन! श्रीकृष्ण और अर्जुन- ये दोनों ही सत्ययुग आदि तीनों युगों में प्रकट होने के कारण त्रियुग कहलाते हैं। देवर्षि नारद और व्यासजी ने इन दोनों के स्वरूप का परिचय दिया था॥56॥
 
Prithvinath! Kamalnayan! Shri Krishna and Arjun – both of them are called Triyuga because they appeared in all three yugas like Satyayuga etc. Devarshi Narad and Vyasji had introduced the form of these two. 56॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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