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mahabharat 13.169.55: इन सनातन श्रीकृष्ण ने गाण्डीवधारी अर्जुन के साथ (नर-नारायण रूप में रहते हुए) बदरिका आश्रम में दस हजार वर्षों तक घोर तपस्या की थी॥55॥   |   mahabharat अध्याय 13.169: भगवान‍् श्री कृष्णकी महिमाका वर्णन और भीष्मजीका युधिष्ठिरको राज्य करनेके लिये आदेश देना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.169.55 
दशवर्षसहस्राणि बदर्यामेष शाश्वत:।
तपश्चचार विपुलं सह गाण्डीवधन्वना॥ ५५॥
 
 
अनुवाद
इन सनातन श्रीकृष्ण ने गाण्डीवधारी अर्जुन के साथ (नर-नारायण रूप में रहते हुए) बदरिका आश्रम में दस हजार वर्षों तक घोर तपस्या की थी॥55॥
 
This eternal Shri Krishna along with Gandiva-dhari Arjun (living in the form of Nar-Narayan) had performed severe penance for ten thousand years in Badarika Ashram. 55॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)