श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 169: भगवान‍् श्री कृष्णकी महिमाका वर्णन और भीष्मजीका युधिष्ठिरको राज्य करनेके लिये आदेश देना  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  13.169.53 
एष तस्यानवद्यस्य नारदस्य महात्मन:।
संदेशो देवपूजार्थं तं तथा कुरु पाण्डव॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
पाण्डुनन्दन! उन सनातन महात्मा देवर्षि नारदजी का यही संदेश है कि महादेवजी की पूजा करनी चाहिए। अतः आप भी ऐसा ही करें। 53॥
 
Pandunandan! This is the message of that eternal Mahatma Devarshi Naradji that Mahadevji should be worshipped. That's why you also do the same. 53॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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