श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 169: भगवान‍् श्री कृष्णकी महिमाका वर्णन और भीष्मजीका युधिष्ठिरको राज्य करनेके लिये आदेश देना  »  श्लोक 52
 
 
श्लोक  13.169.52 
श्रुत्वा वा श्रोतुकामो वाप्यर्चयेद् वृषभध्वजम्।
विशुद्धेनेह भावेन य इच्छेद् भूतिमात्मन:॥ ५२॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य अपना कल्याण चाहता है, उसे इस वार्तालाप को सुनकर अथवा सुनने की इच्छा रखकर शुद्ध भक्ति से भगवान शंकर की पूजा करनी चाहिए ॥ 52॥
 
A person who wants his own welfare, after listening to this conversation or having the desire to hear it, should worship Lord Shankar with pure devotion. ॥ 52॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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