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श्लोक  13.169.50 
धर्मेणापि सदा राजन् प्रजा रक्षितुमर्हसि।
यस्तस्य विपुलो दण्ड: सम्यग्धर्म: स कीर्त्यते॥ ५०॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! आपको सदैव धर्मपूर्वक अपनी प्रजा की रक्षा करनी चाहिए। प्रजा की रक्षा के लिए उचित दण्ड का प्रयोग ही धर्म कहलाता है।
 
O King! You should always protect your subjects in a righteous manner. The punishment used appropriately for the protection of subjects is itself called Dharma. 50.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)