Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.169.50: हे राजन! आपको सदैव धर्मपूर्वक अपनी प्रजा की रक्षा करनी चाहिए। प्रजा की रक्षा के लिए उचित दण्ड का प्रयोग ही धर्म कहलाता है। | mahabharat अध्याय 13.169: भगवान् श्री कृष्णकी महिमाका वर्णन और भीष्मजीका युधिष्ठिरको राज्य करनेके लिये आदेश देना । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
धर्मेणापि सदा राजन् प्रजा रक्षितुमर्हसि।
यस्तस्य विपुलो दण्ड: सम्यग्धर्म: स कीर्त्यते॥ ५०॥
अनुवाद
हे राजन! आपको सदैव धर्मपूर्वक अपनी प्रजा की रक्षा करनी चाहिए। प्रजा की रक्षा के लिए उचित दण्ड का प्रयोग ही धर्म कहलाता है।
O King! You should always protect your subjects in a righteous manner. The punishment used appropriately for the protection of subjects is itself called Dharma. 50.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥