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mahabharat 13.169.47: अतः कल्याण चाहने वाले मनुष्य को जनार्दन की शरण में जाना चाहिए। राजन! ब्राह्मणों ने इन्हीं अविनाशी श्रीकृष्ण की स्तुति की है। 47॥   |   mahabharat अध्याय 13.169: भगवान‍् श्री कृष्णकी महिमाका वर्णन और भीष्मजीका युधिष्ठिरको राज्य करनेके लिये आदेश देना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 169: भगवान‍् श्री कृष्णकी महिमाका वर्णन और भीष्मजीका युधिष्ठिरको राज्य करनेके लिये आदेश देना  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  13.169.47 
न्याय्यं श्रेयोऽभिकामेन प्रतिपत्तुं जनार्दन:।
एष एवाक्षयो विप्रै: स्तुतो राजन् जनार्दन:॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
अतः कल्याण चाहने वाले मनुष्य को जनार्दन की शरण में जाना चाहिए। राजन! ब्राह्मणों ने इन्हीं अविनाशी श्रीकृष्ण की स्तुति की है। 47॥
 
Therefore, the person who desires welfare should take refuge in Janardana. Rajan! Brahmins have praised this immortal Shri Krishna only. 47॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)