Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.169.41-42: अतः हे कुन्तीपुत्र! तुम्हें यहाँ अपने बन्धुओं और सम्बन्धियों के लिए शोक नहीं करना चाहिए। हे कौरवकुल को आनन्द पहुँचाने वाले युधिष्ठिर! तुम्हें सदैव शान्त और क्रोधरहित रहना चाहिए। मैंने तुम्हें माधव श्रीकृष्ण का माहात्म्य जैसा सुना था, वैसा ही बताया है। उनकी महानता समझने के लिए इतना ही पर्याप्त है। सज्जन पुरुष के लिए केवल दिशा ही विद्यमान है ॥ 41-42॥ | mahabharat अध्याय 13.169: भगवान् श्री कृष्णकी महिमाका वर्णन और भीष्मजीका युधिष्ठिरको राज्य करनेके लिये आदेश देना । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अतः हे कुन्तीपुत्र! तुम्हें यहाँ अपने बन्धुओं और सम्बन्धियों के लिए शोक नहीं करना चाहिए। हे कौरवकुल को आनन्द पहुँचाने वाले युधिष्ठिर! तुम्हें सदैव शान्त और क्रोधरहित रहना चाहिए। मैंने तुम्हें माधव श्रीकृष्ण का माहात्म्य जैसा सुना था, वैसा ही बताया है। उनकी महानता समझने के लिए इतना ही पर्याप्त है। सज्जन पुरुष के लिए केवल दिशा ही विद्यमान है ॥ 41-42॥
Therefore, son of Kunti, you should not grieve for your brothers and relatives here. O Yudhishthira, who brings joy to the Kaurava clan, you should always remain calm and free from anger. I have told you the greatness of Madhava Sri Krishna as I had heard. This much is sufficient to understand his greatness. For a gentleman, only the direction is present. ॥ 41-42॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥