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mahabharat 13.169.4: फिर क्षण भर में सारा आकाश स्वच्छ हो गया। कहीं भी बादल नहीं रहे। तब ब्राह्मण तीर्थयात्रा के लिए चले गए और अन्य लोग भी जिस मार्ग से आए थे, उसी मार्ग से लौट गए॥4॥   |   mahabharat अध्याय 13.169: भगवान‍् श्री कृष्णकी महिमाका वर्णन और भीष्मजीका युधिष्ठिरको राज्य करनेके लिये आदेश देना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 169: भगवान‍् श्री कृष्णकी महिमाका वर्णन और भीष्मजीका युधिष्ठिरको राज्य करनेके लिये आदेश देना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  13.169.4 
व्यभ्रं च गगनं सद्य: क्षणेन समपद्यत।
तीर्थयात्रां ततो विप्रा जग्मुश्चान्ये यथागतम्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
फिर क्षण भर में सारा आकाश स्वच्छ हो गया। कहीं भी बादल नहीं रहे। तब ब्राह्मण तीर्थयात्रा के लिए चले गए और अन्य लोग भी जिस मार्ग से आए थे, उसी मार्ग से लौट गए॥4॥
 
Then in a moment the whole sky became clear. There were no clouds left anywhere. Then the Brahmins left for pilgrimage and the other people also returned the same way they had come. ॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)