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mahabharat 13.169.36: हम इस संसार में मंदबुद्धि, परावलम्बी और अशान्त मनुष्य हैं। हमने जान-बूझकर मृत्यु के अनिवार्य पथ पर पैर रखा है॥ 36॥   |   mahabharat अध्याय 13.169: भगवान‍् श्री कृष्णकी महिमाका वर्णन और भीष्मजीका युधिष्ठिरको राज्य करनेके लिये आदेश देना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.169.36 
वयं त्विहाल्पमतय: परतन्त्रा: सुविक्लवा:।
ज्ञानपूर्वं प्रपन्ना: स्मो मृत्यो: पन्थानमव्ययम्॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
हम इस संसार में मंदबुद्धि, परावलम्बी और अशान्त मनुष्य हैं। हमने जान-बूझकर मृत्यु के अनिवार्य पथ पर पैर रखा है॥ 36॥
 
We are dull-witted, dependent and restless human beings in this world. We have knowingly set foot on the inevitable path of death.॥ 36॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)