श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 169: भगवान‍् श्री कृष्णकी महिमाका वर्णन और भीष्मजीका युधिष्ठिरको राज्य करनेके लिये आदेश देना  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  13.169.33 
यत् तु गोवृषभांकेन मुनिभ्य: समुदाहृतम्।
पुराणं हिमवत्पृष्ठे तन्मे निगदत: शृणु॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
वृषभध्वज भगवान शंकर ने हिमालय के शिखर पर ऋषियों को जो प्राचीन रहस्य बताया था, उसे मुझसे सुनो॥33॥
 
Listen from me the ancient secret which Vrishabhadhwaj Lord Shankar had told to the sages on the peak of the Himalayas. 33॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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