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mahabharat 13.169.32: अर्जुन योगबल से भी संपन्न हैं और युग के अंत की अग्नि के समान तेजस्वी हैं। वे बाएँ हाथ से भी बाण चलाते हैं और युद्धभूमि में सदैव सबसे आगे रहते हैं। हे पुरुषों के स्वामी! उन्होंने अपने तेज से दुर्योधन की समस्त सेना का संहार कर दिया है। 32.   |   mahabharat अध्याय 13.169: भगवान‍् श्री कृष्णकी महिमाका वर्णन और भीष्मजीका युधिष्ठिरको राज्य करनेके लिये आदेश देना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.169.32 
जयो योगी युगान्ताभ: सव्यसाची रणाग्रग:।
तेजसा हतवान् सर्वं सुयोधनबलं नृप॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
अर्जुन योगबल से भी संपन्न हैं और युग के अंत की अग्नि के समान तेजस्वी हैं। वे बाएँ हाथ से भी बाण चलाते हैं और युद्धभूमि में सदैव सबसे आगे रहते हैं। हे पुरुषों के स्वामी! उन्होंने अपने तेज से दुर्योधन की समस्त सेना का संहार कर दिया है। 32.
 
Arjuna is also endowed with the power of yoga and is as radiant as the fire of the end of the age. He shoots arrows with his left hand as well and is always at the forefront in the battlefield. O Lord of men! With his brilliance he has destroyed the entire army of Duryodhan. 32.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)