श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 169: भगवान‍् श्री कृष्णकी महिमाका वर्णन और भीष्मजीका युधिष्ठिरको राज्य करनेके लिये आदेश देना  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  13.169.31 
प्रतियोद्धुं न शक्यो हि मानुषैरेष संयुगे।
विहीनै: पुरुषव्याघ्र सत्त्वशक्तिबलादिभि:॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
हे पुरुषसिंह! जो मनुष्य सत्त्व (धैर्य), बल और पराक्रम आदि में स्वभावतः हीन हैं, वे युद्ध में इन श्रीकृष्ण का सामना नहीं कर सकते॥31॥
 
Purusha Singh! Human beings who are naturally inferior in sattva (patience), power and strength etc. cannot face this Shri Krishna in battle. 31॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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