श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 169: भगवान‍् श्री कृष्णकी महिमाका वर्णन और भीष्मजीका युधिष्ठिरको राज्य करनेके लिये आदेश देना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  13.169.28 
स भवांस्त्वमुपाध्वर्यू रणाग्नौ हुतवान् नृपान्।
कृष्णस्रुवेण महता युगान्ताग्निसमेन वै॥ २८॥
 
 
अनुवाद
आप स्वयं होता हुए और प्रलयकाल की अग्नि के समान तेजस्वी श्रीकृष्णरूपी विशाल धनुष-बाण द्वारा समस्त राजाओं को युद्ध की ज्वालाओं में स्वाहा कर दिया॥28॥
 
You yourself became Hota and with the help of the huge bow and arrow in the form of Shri Krishna, who was as radiant as the fire of doomsday, sacrificed all the kings in the flames of the war. ॥28॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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