श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 169: भगवान‍् श्री कृष्णकी महिमाका वर्णन और भीष्मजीका युधिष्ठिरको राज्य करनेके लिये आदेश देना  »  श्लोक 26-27
 
 
श्लोक  13.169.26-27 
सुदुस्तरार्थतत्त्वस्य वक्ता कर्ता च माधव:।
तव पार्थ जय: कृत्स्नस्तव कीर्तिस्तथातुला॥ २६॥
तवेयं पृथिवी देवी कृत्स्ना नारायणाश्रयात्।
अयं नाथस्तवाचिन्त्यो यस्य नारायणो गति:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
ये माधव दुर्बोधतत्त्व के वक्ता और कर्ता हैं। कुन्तीनन्दन! आपकी सम्पूर्ण विजय, अतुलनीय यश और सम्पूर्ण पृथ्वी का राज्य - ये सब आपको भगवान नारायण की शरण में आकर ही प्राप्त हुए हैं। ये अचिन्त्य नारायण ही आपके रक्षक और परम गति हैं। 26-27॥
 
This Madhava is the speaker and doer of Durbodh Tattva. Kuntinandan! Your complete victory, incomparable fame and kingdom of the whole earth – all these have been attained by you only by taking shelter of Lord Narayana. This unimaginable Narayana is your protector and ultimate destination. 26-27॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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