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mahabharat 13.169.20: हे प्रभु! दसवें महीने के पूर्ण होने पर रुक्मिणी देवी के गर्भ से इस भगवान के यहाँ एक अत्यंत अद्भुत, मनोहर और पराक्रमी पुत्र उत्पन्न हुआ, जो इनके वंश को आगे बढ़ाएगा।   |   mahabharat अध्याय 13.169: भगवान‍् श्री कृष्णकी महिमाका वर्णन और भीष्मजीका युधिष्ठिरको राज्य करनेके लिये आदेश देना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.169.20 
पूर्णे च दशमे मासि पुत्रोऽस्य परमाद्भुत:।
रुक्मिण्यां सम्मतो जज्ञे शूरो वंशधर: प्रभो॥ २०॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! दसवें महीने के पूर्ण होने पर रुक्मिणी देवी के गर्भ से इस भगवान के यहाँ एक अत्यंत अद्भुत, मनोहर और पराक्रमी पुत्र उत्पन्न हुआ, जो इनके वंश को आगे बढ़ाएगा।
 
O Lord! After the completion of the tenth month, from the womb of Rukmini Devi a very wonderful, charming and valiant son was born to this Lord who will carry forward his lineage.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)