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mahabharat 13.169.18: भीष्मजी कहते हैं-युधिष्ठिर! तदनन्तर उन महर्षि ने उन यदुकुलरत्न देवेश्वर पुरूषोत्तम को प्रणाम किया तथा उनकी प्रदक्षिणा की और चले गये। 18॥   |   mahabharat अध्याय 13.169: भगवान‍् श्री कृष्णकी महिमाका वर्णन और भीष्मजीका युधिष्ठिरको राज्य करनेके लिये आदेश देना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 169: भगवान‍् श्री कृष्णकी महिमाका वर्णन और भीष्मजीका युधिष्ठिरको राज्य करनेके लिये आदेश देना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  13.169.18 
भीष्म उवाच
तत: प्रणम्य देवेशं यादवं पुरुषोत्तमम्।
प्रदक्षिणमुपावृत्य प्रजग्मुस्ते महर्षय:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
भीष्मजी कहते हैं-युधिष्ठिर! तदनन्तर उन महर्षि ने उन यदुकुलरत्न देवेश्वर पुरूषोत्तम को प्रणाम किया तथा उनकी प्रदक्षिणा की और चले गये। 18॥
 
Bhishmaji says – Yudhishthir! Thereafter, that Maharishi paid obeisance to that Yadukularatna Deveshwar Purushottam and circumambulated him and went away. 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)