श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 169: भगवान‍् श्री कृष्णकी महिमाका वर्णन और भीष्मजीका युधिष्ठिरको राज्य करनेके लिये आदेश देना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  13.169.10 
अथर्षय: सम्प्रहृष्टा: पुनस्ते कृष्णमब्रुवन्।
पुन: पुन: दर्शयास्मान् सदैव मधुसूदन॥ १०॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् महर्षि पुनः हर्ष में भरकर श्रीकृष्ण से बोले - 'मधुसूदन! आप हमें बार-बार दर्शन देते रहें।॥ 10॥
 
Thereafter the great sage again filled with joy said to Shri Krishna - 'Madhusudana! You keep on giving us darshan again and again.॥ 10॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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