श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 169: भगवान‍् श्री कृष्णकी महिमाका वर्णन और भीष्मजीका युधिष्ठिरको राज्य करनेके लिये आदेश देना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  13.169.1 
नारद उवाच
अथ व्योम्नि महान् शब्द: सविद्युत्स्तनयित्नुमान्।
मेघैश्च गगनं नीलं संरुद्धमभवद् घनै:॥ १॥
 
 
अनुवाद
नारद कहते हैं, "शीघ्र ही आकाश में बिजली की कड़कने और बादलों के गरजने की तेज आवाज हुई। घने बादलों से घिरकर पूरा आकाश नीला हो गया।
 
Narada says, "Soon there was a loud sound of thundering of lightning and the roaring of the clouds in the sky. The entire sky became blue after being surrounded by heavy clouds.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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