vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 13: अनुशासन पर्व
»
अध्याय 168: वंशपरम्पराका कथन और भगवान् श्रीकृष्णके माहात्म्यका वर्णन
»
श्लोक 57
श्लोक
13.168.57
चिन्तितानि समेष्यन्ति शस्त्राण्यस्त्राणि चैव ह।
अनन्तश्च स एवोक्तो भगवान् हरिरव्यय:॥ ५७॥
अनुवाद
उनका स्मरण मात्र करने से ही समस्त दिव्य अस्त्र-शस्त्र प्राप्त हो जाते हैं। अविनाशी भगवान श्रीहरि को अनंत शेषनाग भी कहते हैं। 57.
Just by thinking about Him, one will get all the divine weapons. The indestructible Lord Shri Hari is also known as Ananta Sheshnag. 57.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×