श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 168: वंशपरम्पराका कथन और भगवान‍् श्रीकृष्णके माहात्म्यका वर्णन  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  13.168.48 
एतत् तस्यानवद्यस्य विष्णोर्वै परमं व्रतम्।
आदिदेवस्य महत: सज्जनाचरितं सदा॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
यह उन स्तुतियोग्य आदिदेव भगवान महाविष्णु का उत्तम व्रत है, जिसका मुनिजनों द्वारा सदैव पालन किया जाता रहा है ॥48॥
 
This is the best fast of that praiseworthy primal deity, Lord Maha Vishnu, which has always been observed by saints. ॥ 48॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)