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mahabharat 13.168.41: जो मनुष्य मनुष्य लोक में भगवान श्रीकृष्ण की शरण लेता है, वह यश, विजय और उत्तम स्वर्ग को प्राप्त करता है ॥41॥   |   mahabharat अध्याय 13.168: वंशपरम्पराका कथन और भगवान‍् श्रीकृष्णके माहात्म्यका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.168.41 
यश्च तं मानवे लोके संश्रयिष्यति केशवम्।
तस्य कीर्तिर्जयश्चैव स्वर्गश्चैव भविष्यति॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य मनुष्य लोक में भगवान श्रीकृष्ण की शरण लेता है, वह यश, विजय और उत्तम स्वर्ग को प्राप्त करता है ॥41॥
 
One who takes refuge in Lord Krishna in the human world will attain fame, victory and the best heaven. 41॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)