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mahabharat 13.168.39: हे तपस्वियों! उनके दर्शन करके तुमने मुझे देखा है अथवा उनके दर्शन करके तुमने देवताओं के स्वामी ब्रह्माजी को देखा है। मुझे इस विषय में विचार करने की आवश्यकता नहीं है, अर्थात् मुझे इसमें कोई संदेह नहीं है॥39॥   |   mahabharat अध्याय 13.168: वंशपरम्पराका कथन और भगवान‍् श्रीकृष्णके माहात्म्यका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.168.39 
दृष्टे तस्मिन्नहं दृष्टो न मेऽत्रास्ति विचारणा।
पितामहो वा देवेश इति वित्त तपोधना:॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
हे तपस्वियों! उनके दर्शन करके तुमने मुझे देखा है अथवा उनके दर्शन करके तुमने देवताओं के स्वामी ब्रह्माजी को देखा है। मुझे इस विषय में विचार करने की आवश्यकता नहीं है, अर्थात् मुझे इसमें कोई संदेह नहीं है॥39॥
 
O ascetics! After having his darshan, you have seen me or by having his darshan, you have seen the lord of gods, Brahmaji. I do not have to think about this, that is, I have no doubt. ॥ 39॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)