श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 168: वंशपरम्पराका कथन और भगवान‍् श्रीकृष्णके माहात्म्यका वर्णन  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  13.168.37 
तं भवन्त: समासाद्य वाङ्माल्यैरर्हणैर्वरै:।
अर्चयन्तु यथान्यायं ब्रह्माणमिव शाश्वतम्॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
तुम सब लोग उसी परमेश्वर की शरण जाओ और अपनी पवित्र मालाओं तथा उत्तम पूजन विधियों से सनातन ब्रह्मा के समान उसकी विधिपूर्वक पूजा करो॥37॥
 
You all take refuge in the same God and worship Him appropriately like Sanatan Brahma with your sacred garlands and the best worship methods. 37॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)