vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 13: अनुशासन पर्व
»
अध्याय 168: वंशपरम्पराका कथन और भगवान् श्रीकृष्णके माहात्म्यका वर्णन
»
श्लोक 35
श्लोक
13.168.35
पृथिव्यामप्रतिहतो वीर्येण च भविष्यति।
विक्रमेण च सम्पन्न: सर्वपार्थिवपार्थिव:॥ ३५॥
अनुवाद
वह अपने बल और पराक्रम के कारण इस पृथ्वी पर अजेय होगा। वह पराक्रम से संपन्न होगा और सभी राजाओं का राजा होगा ॥35॥
He will be invincible on this earth due to his strength and valour. He will be blessed with valour and will be the king of all kings. ॥35॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×