श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 168: वंशपरम्पराका कथन और भगवान‍् श्रीकृष्णके माहात्म्यका वर्णन  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  13.168.35 
पृथिव्यामप्रतिहतो वीर्येण च भविष्यति।
विक्रमेण च सम्पन्न: सर्वपार्थिवपार्थिव:॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
वह अपने बल और पराक्रम के कारण इस पृथ्वी पर अजेय होगा। वह पराक्रम से संपन्न होगा और सभी राजाओं का राजा होगा ॥35॥
 
He will be invincible on this earth due to his strength and valour. He will be blessed with valour and will be the king of all kings. ॥35॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)