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mahabharat 13.168.1: ऋषियों ने कहा - हे जगत् विख्यात भगवान शंकर, जिन्होंने भगवान शिव के नेत्रों को नष्ट कर दिया था! अब हम वासुदेव (श्रीकृष्ण) का माहात्म्य सुनना चाहते हैं॥1॥   |   mahabharat अध्याय 13.168: वंशपरम्पराका कथन और भगवान‍् श्रीकृष्णके माहात्म्यका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.168.1 
ऋषय ऊचु:
पिनाकिन् भगनेत्रघ्न सर्वलोकनमस्कृत।
माहात्म्यं वासुदेवस्य श्रोतुमिच्छामि शङ्कर॥ १॥
 
 
अनुवाद
ऋषियों ने कहा - हे जगत् विख्यात भगवान शंकर, जिन्होंने भगवान शिव के नेत्रों को नष्ट कर दिया था! अब हम वासुदेव (श्रीकृष्ण) का माहात्म्य सुनना चाहते हैं॥1॥
 
The sages said – Lord Shankar, the world-renowned one, who destroyed the eyes of Lord Shiva! Now we want to hear the greatness of Vasudev (Shri Krishna). 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)