श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 167: पार्वतीजीके द्वारा स्त्री-धर्मका वर्णन  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  13.167.40 
देववत् सततं साध्वी भर्तारमनुपश्यति।
दम्पत्योरेष वै धर्म: सहधर्मकृत: शुभ:॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
पतिव्रता स्त्री सदैव अपने पति को परमेश्वर मानती है। पति-पत्नी का सहधर्म (साथ रहना और धर्म का पालन करना) का यह स्वरूप अत्यंत शुभ है।
 
A virtuous woman always considers her husband as God. This form of Sahadharma (living together and practising Dharma) of husband and wife is extremely auspicious.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)