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श्री महाभारत
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पर्व 13: अनुशासन पर्व
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अध्याय 167: पार्वतीजीके द्वारा स्त्री-धर्मका वर्णन
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श्लोक 33
श्लोक
13.167.33
उमोवाच
स्त्रीधर्मो मां प्रति यथा प्रतिभाति यथाविधि।
तमहं कीर्तयिष्यामि तथैव प्रश्रिता भव॥ ३३॥
अनुवाद
उमा बोलीं, "मैं तुम्हें स्त्री के कर्तव्य का स्वरूप बताऊंगी, जैसा वह मुझे प्रतीत होता है। तुम उसे विनम्रता और जिज्ञासा के साथ सुनो।"
Uma said, "I will tell you the nature of a woman's duty as it appears to me. You listen to it with humility and curiosity." 33.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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