श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 167: पार्वतीजीके द्वारा स्त्री-धर्मका वर्णन  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  13.167.28 
प्रभवन् पृच्छते यो हि सम्मानयति वा पुन:।
नूनं जनमदुष्टात्मा पण्डिताख्यां स गच्छति॥ २८॥
 
 
अनुवाद
जो व्यक्ति हर दृष्टि से समर्थ होते हुए भी दूसरों से पूछता है, उनका आदर करता है तथा जिसके मन में कभी बुरे विचार नहीं आते, वह निःसंदेह विद्वान् कहलाता है।
 
A person who, despite being capable in every aspect, asks others and respects them and whose mind never has evil thoughts, is undoubtedly called a learned person.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)