Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.166.d35: देवी! मुझे अपने भक्तों द्वारा अर्पित फल, फूल, सब्ज़ियाँ और यहाँ तक कि जल भी प्रिय है, जो मुझ पर एकाग्र रहते हैं। जब मैं संतुष्ट हो जाती हूँ, तो इस संसार में कुछ भी दुर्लभ नहीं रह जाता; इसीलिए मेरे भक्त सदैव मेरी पूजा करते हैं। | mahabharat अध्याय 13.166: पाशुपत योगका वर्णन तथा शिवलिंग-पूजनका माहात्म्य] । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
फलं वा यदि वा शाकं पुष्पं वा यदि वा जलम्।
दत्तं सम्प्रीणयेद् देवि भक्तैैर्मद्गतमानसै:।
ममापि परितुष्टस्य नास्ति लोकेषु दुर्लभम्।
तस्मात् ते सततं भक्ता मामेवाभ्यर्चयन्त्युत॥
अनुवाद
देवी! मुझे अपने भक्तों द्वारा अर्पित फल, फूल, सब्ज़ियाँ और यहाँ तक कि जल भी प्रिय है, जो मुझ पर एकाग्र रहते हैं। जब मैं संतुष्ट हो जाती हूँ, तो इस संसार में कुछ भी दुर्लभ नहीं रह जाता; इसीलिए मेरे भक्त सदैव मेरी पूजा करते हैं।
Devi! I like fruits, flowers, vegetables or even water offered by my devotees who are focused on me. When I am satisfied, nothing is rare in this world; that is why my devotees always worship me.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥