Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.164.d60-d62: श्री महेश्वर बोले - देवि! इस ईश्वर को ऋषि और देवता भी प्रत्यक्ष नहीं देख सकते। जो उस ईश्वर को वास्तव में जान लेता है, वह इस संसार में पुनः लौटकर नहीं आता। देवि! अतः उस ईश्वर को देखकर मनुष्य परम मोक्ष को प्राप्त होता है। इस प्रकार यह सनातन सांख्य धर्म तुम्हें समझाया गया है; जिसकी सेवा कपिल आदि आचार्य और महर्षि करते हैं। | mahabharat अध्याय 13.164: सांख्यज्ञानका प्रतिपादन करते हुए अव्यक्तादि चौबीस तत्त्वोंकी उत्पत्ति आदिका वर्णन] । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
श्री महेश्वर बोले - देवि! इस ईश्वर को ऋषि और देवता भी प्रत्यक्ष नहीं देख सकते। जो उस ईश्वर को वास्तव में जान लेता है, वह इस संसार में पुनः लौटकर नहीं आता। देवि! अतः उस ईश्वर को देखकर मनुष्य परम मोक्ष को प्राप्त होता है। इस प्रकार यह सनातन सांख्य धर्म तुम्हें समझाया गया है; जिसकी सेवा कपिल आदि आचार्य और महर्षि करते हैं।
Shri Maheshwar said - Devi! Even sages and gods cannot see this God directly. One who actually realizes that God does not return to this world again. Devi! Therefore, by seeing that God, one attains the ultimate salvation. In this way, this eternal Sankhya Dharma has been explained to you; which is served by Acharyas and Maharishis like Kapil.
(दाक्षिणात्य प्रतिमें अध्याय समाप्त)
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥