श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 164: सांख्यज्ञानका प्रतिपादन करते हुए अव्यक्तादि चौबीस तत्त्वोंकी उत्पत्ति आदिका वर्णन]  »  श्लोक d59
 
 
श्लोक  13.164.d59 
उमोवाच
ऊहवान् ब्राह्मणो लोके नित्यमक्षरमव्ययम्।
अस्त्यात्मा सर्वदेहेषु हेतुस्तत्र सुदुर्गम:॥
 
 
अनुवाद
उमान ने कहा - प्रभु! इस संसार में विचारशील ब्राह्मण हमें यह तो बताते हैं कि सम्पूर्ण शरीर में एक अनादि, अमर, अविनाशी आत्मा अवश्य विद्यमान है। किन्तु उसकी सत्यता का कारण क्या है, यह जानना अत्यन्त कठिन है।
 
Uman said – Lord! The thoughtful Brahmin in this world tells us that there is definitely an eternal, immortal, imperishable soul in the entire body. But it is very difficult to know what is the reason for its truth.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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