Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.164.d57-d58: अन्य मूर्ख नास्तिक आत्मा के अस्तित्व को नहीं मानते क्योंकि वह भौतिक लक्षणों से भिन्न है। जो लोग यह निश्चय करते हैं कि आत्मा नहीं है, वे नरक के वासी बनते हैं। इस प्रकार वे महेश्वर के विषय में अनेक प्रकार से विचार करते हैं। | mahabharat अध्याय 13.164: सांख्यज्ञानका प्रतिपादन करते हुए अव्यक्तादि चौबीस तत्त्वोंकी उत्पत्ति आदिका वर्णन] । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अन्य मूर्ख नास्तिक आत्मा के अस्तित्व को नहीं मानते क्योंकि वह भौतिक लक्षणों से भिन्न है। जो लोग यह निश्चय करते हैं कि आत्मा नहीं है, वे नरक के वासी बनते हैं। इस प्रकार वे महेश्वर के विषय में अनेक प्रकार से विचार करते हैं।
Other foolish atheists do not believe in the existence of the soul because it is different from the physical characteristics. Those people who decide that there is no soul become residents of hell. In this way, they think about Maheshwar in many ways.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥