Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.164.d48-d49: वह महाशक्तिमान, अनेक भावों से युक्त, सभी सजीव-अजीव वस्तुओं में एकाकार होकर निवास करता है। वह न ऊपर, न बगल में, न नीचे दिखाई देता है। वह यहाँ इन्द्रियों या बुद्धि द्वारा कभी नहीं देखा जाता। | mahabharat अध्याय 13.164: सांख्यज्ञानका प्रतिपादन करते हुए अव्यक्तादि चौबीस तत्त्वोंकी उत्पत्ति आदिका वर्णन] । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स हि सर्वेषु भूतेषु स्थावरेषु चरेषु च।
वसत्येको महावीर्यो नानाभावसमन्वित:॥
नैव चोर्ध्वं न तिर्यक् च नाधस्तान्न कदाचन।
इन्द्रियैरिह बुद्ध्या वा न दृश्येत कदाचन॥
अनुवाद
वह महाशक्तिमान, अनेक भावों से युक्त, सभी सजीव-अजीव वस्तुओं में एकाकार होकर निवास करता है। वह न ऊपर, न बगल में, न नीचे दिखाई देता है। वह यहाँ इन्द्रियों या बुद्धि द्वारा कभी नहीं देखा जाता।
That mighty and powerful God, endowed with various emotions, resides alone in all living and non-living things. He is never seen above, beside or below. He is never seen here by the senses or the intellect.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥