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mahabharat 13.164.d45: शरीर से परे देहधारी आत्मा है, जो शरीर में ही निवास करती है। जो शरीर और देह में अंतर जानता है, वही ऋषि है।   |   mahabharat अध्याय 13.164: सांख्यज्ञानका प्रतिपादन करते हुए अव्यक्तादि चौबीस तत्त्वोंकी उत्पत्ति आदिका वर्णन]   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.164.d45 
शरीराच्च परो देही शरीरं च व्यपाश्रित:।
शरीरिण: शरीरस्य सोऽन्तरं वेत्ति वै मुनि:॥
 
 
अनुवाद
शरीर से परे देहधारी आत्मा है, जो शरीर में ही निवास करती है। जो शरीर और देह में अंतर जानता है, वही ऋषि है।
 
Beyond the body is the embodied soul, which lives in the body only. The one who knows the difference between the body and the embodied is a sage.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)