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mahabharat 13.164.d39-d40: कान, त्वचा, आँख, जीभ और नाक ज्ञानेन्द्रियाँ हैं। हाथ, पैर, वाणी, लिंग और गुदा कर्मेन्द्रियाँ हैं। शब्द, स्पर्श, रूप, रस और पाँचवीं गंध ज्ञानेन्द्रियाँ मानी जाती हैं। ये पाँच तत्वों से उत्पन्न हुई हैं।   |   mahabharat अध्याय 13.164: सांख्यज्ञानका प्रतिपादन करते हुए अव्यक्तादि चौबीस तत्त्वोंकी उत्पत्ति आदिका वर्णन]   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.164.d39-d40 
बुद्धीन्द्रियाणि कर्णत्वक्चक्षुर्जिह्वाथ नासिका।
कर्मेन्द्रियाणि वाक्पाणिपादौ मेढ्रं गुदस्तथा॥
शब्द: स्पर्शश्च रूपं च रसो गन्धश्च पञ्चम:।
बुद्धीन्द्रियार्थान् जानीयाद् भूतेभ्यस्त्वभिनि:सृतान्॥
 
 
अनुवाद
कान, त्वचा, आँख, जीभ और नाक ज्ञानेन्द्रियाँ हैं। हाथ, पैर, वाणी, लिंग और गुदा कर्मेन्द्रियाँ हैं। शब्द, स्पर्श, रूप, रस और पाँचवीं गंध ज्ञानेन्द्रियाँ मानी जाती हैं। ये पाँच तत्वों से उत्पन्न हुई हैं।
 
Ears, skin, eyes, tongue and nose are the sense organs. Hands, feet, speech, penis and anus are the action organs. Sound, touch, form, taste and the fifth smell are considered as the sense organs. These have emerged from the five elements.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)