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mahabharat 13.164.d31: शब्द, श्रवणेन्द्रिय और इन्द्रिय के छिद्र - ये तीनों आकाश से प्रकट हुए हैं। स्पर्श और प्राणियों की गति - ये वायु के गुण माने गए हैं।   |   mahabharat अध्याय 13.164: सांख्यज्ञानका प्रतिपादन करते हुए अव्यक्तादि चौबीस तत्त्वोंकी उत्पत्ति आदिका वर्णन]   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.164.d31 
शब्द: श्रोत्रं तथा खानि त्रयमाकाशसम्भवम्।
स्पर्शवत् प्राणिनां चेष्टा पवनस्य गुणा: स्मृता:॥
 
 
अनुवाद
शब्द, श्रवणेन्द्रिय और इन्द्रिय के छिद्र - ये तीनों आकाश से प्रकट हुए हैं। स्पर्श और प्राणियों की गति - ये वायु के गुण माने गए हैं।
 
Sound, hearing organ and holes of senses – all three have appeared from the sky. Touch and movements of living beings – these are considered to be the qualities of air.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)