Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.164.d3-d6: पच्चीस तत्वों का ज्ञान ही सांख्य ज्ञान माना जाता है। मूल प्रकृति को अव्यक्त कहा गया है, अव्यक्त से महातत्त्व की उत्पत्ति होती है। महातत्त्व से अहंकार प्रकट होता है और अहंकार से पाँच तन्मात्राएँ उत्पन्न होती हैं। तन्मात्राओं से दस इन्द्रियाँ और एक मन उत्पन्न होते हैं। इनसे पाँच भूत उत्पन्न होते हैं और पाँच भूतों से यह शरीर निर्मित होता है। यही क्षेत्र का संक्षिप्त रूप है। इसे चौबीस तत्वों का समुदाय कहा गया है। इनमें पुरुष सहित कुल पच्चीस तत्व बताए गए हैं। | mahabharat अध्याय 13.164: सांख्यज्ञानका प्रतिपादन करते हुए अव्यक्तादि चौबीस तत्त्वोंकी उत्पत्ति आदिका वर्णन] । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
पच्चीस तत्वों का ज्ञान ही सांख्य ज्ञान माना जाता है। मूल प्रकृति को अव्यक्त कहा गया है, अव्यक्त से महातत्त्व की उत्पत्ति होती है। महातत्त्व से अहंकार प्रकट होता है और अहंकार से पाँच तन्मात्राएँ उत्पन्न होती हैं। तन्मात्राओं से दस इन्द्रियाँ और एक मन उत्पन्न होते हैं। इनसे पाँच भूत उत्पन्न होते हैं और पाँच भूतों से यह शरीर निर्मित होता है। यही क्षेत्र का संक्षिप्त रूप है। इसे चौबीस तत्वों का समुदाय कहा गया है। इनमें पुरुष सहित कुल पच्चीस तत्व बताए गए हैं।
Knowledge of twenty-five elements is considered Sankhya Gyan. The basic nature is called latent, from latent comes the origin of Mahatattva. Ego appears from Mahatattva and from ego five Tanmatras are born. Ten senses and one mind originate from tanmatras. Five ghosts emerge from them and this body is formed from five ghosts. This is the summary form of the area. This is called the community of twenty-four elements. In these, a total of twenty-five elements have been mentioned, including Purusha.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥