Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.164.d25-d27: सत्वगुण में स्थित पुरुष ऊर्ध्वलोक (स्वर्ग आदि) में जाते हैं, रजोगुणी पुरुष मध्यलोक (मनुष्य योनि) में स्थित होते हैं और तमोगुण के कारण निद्रा, प्रमाद और आलस्य आदि में स्थित तामसिक पुरुष कीट, पशु आदि अधोलोकों तथा नरक आदि में जाते हैं। देव, मनुष्य और तिर्यक आदि लोकों में रहने वाले जीव अनादि काल से इन्हीं तीनों गुणों से युक्त और व्याप्त हैं। अब मैं महत् आदि तत्त्वों के लक्षण कहूँगा। बुद्धि से होने वाला विवेक और ज्ञान ही शरीर में महत्त्व का लक्षण है।   |   mahabharat अध्याय 13.164: सांख्यज्ञानका प्रतिपादन करते हुए अव्यक्तादि चौबीस तत्त्वोंकी उत्पत्ति आदिका वर्णन]   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 164: सांख्यज्ञानका प्रतिपादन करते हुए अव्यक्तादि चौबीस तत्त्वोंकी उत्पत्ति आदिका वर्णन]  »  श्लोक d25-d27
 
 
श्लोक  13.164.d25-d27 
ऊर्ध्वं गच्छन्ति सत्त्वस्था मध्ये तिष्ठन्ति राजसा:।
जघन्यगुणवृत्तिस्था अधो गच्छन्ति तामसा:॥
देवमानुषतिर्यक्षु यद्भूतं सचराचरम्।
आदिप्रभृति संयुक्तं व्याप्तमेभिस्त्रिभिर्गुणै:॥
अत: परं प्रवक्ष्यामि महदादीनि लिङ्गत:।
विज्ञानं च विवेकश्च महतो लक्षणं भवेत्॥
 
 
अनुवाद
सत्वगुण में स्थित पुरुष ऊर्ध्वलोक (स्वर्ग आदि) में जाते हैं, रजोगुणी पुरुष मध्यलोक (मनुष्य योनि) में स्थित होते हैं और तमोगुण के कारण निद्रा, प्रमाद और आलस्य आदि में स्थित तामसिक पुरुष कीट, पशु आदि अधोलोकों तथा नरक आदि में जाते हैं। देव, मनुष्य और तिर्यक आदि लोकों में रहने वाले जीव अनादि काल से इन्हीं तीनों गुणों से युक्त और व्याप्त हैं। अब मैं महत् आदि तत्त्वों के लक्षण कहूँगा। बुद्धि से होने वाला विवेक और ज्ञान ही शरीर में महत्त्व का लक्षण है।
 
The men who are situated in Sattva Guna go to the upper world (heaven etc.), the Rajoguni men are situated in the middle world (human life) and the Tamasic men situated in the form of sleep, carelessness and laziness etc. due to Tamo Guna go to the lower worlds like insects, animals etc. and hell etc. The living beings living in the worlds like gods, humans and Tiryaka etc., are united and pervaded by these three gunas since the beginning of time. Now I will tell the characteristics of Mahat etc. elements. The discrimination and knowledge that comes through the intellect is the sign of greatness in the body.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)