Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.163.d95: अक्षय सूर्य अस्त होकर पुनः उदय होता है, तथा सभी जीवों का जीवन नष्ट कर देता है।   |   mahabharat अध्याय 13.163: मोक्षधर्मकी श्रेष्ठताका प्रतिपादन, मोक्षसाधक ज्ञानकी प्राप्तिका उपाय और मोक्षकी प्राप्तिमें वैराग्यकी प्रधानता]   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 163: मोक्षधर्मकी श्रेष्ठताका प्रतिपादन, मोक्षसाधक ज्ञानकी प्राप्तिका उपाय और मोक्षकी प्राप्तिमें वैराग्यकी प्रधानता]  »  श्लोक d95
 
 
श्लोक  13.163.d95 
जीवितं सर्वभूतानामक्षय: क्षपयन्नसौ।
आदित्यो ह्यस्तमभ्येति पुन: पुनरुदेति च॥
 
 
अनुवाद
अक्षय सूर्य अस्त होकर पुनः उदय होता है, तथा सभी जीवों का जीवन नष्ट कर देता है।
 
The inexhaustible Sun sets and rises again, destroying the lives of all living beings.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)