श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 163: मोक्षधर्मकी श्रेष्ठताका प्रतिपादन, मोक्षसाधक ज्ञानकी प्राप्तिका उपाय और मोक्षकी प्राप्तिमें वैराग्यकी प्रधानता]  »  श्लोक d88
 
 
श्लोक  13.163.d88 
श्रीमहेश्वर उवाच
नैतदस्ति महाभागे जरामृत्युनिवर्तनम्।
सर्वलोकेषु जानीहि मोक्षादन्यत्र भामिनि॥
 
 
अनुवाद
श्री महेश्वर ने कहा - महाभागे! ऐसी बात नहीं होती। भामिनी! तुम्हें यह जानना चाहिए कि सम्पूर्ण जगत में मोक्ष के अतिरिक्त मृत्यु का कहीं अन्त नहीं है।
 
Shri Maheshwar said – Mahabhage! Such a thing does not happen. Bhamini! You should know that in the whole world there is no end to death except salvation.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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