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श्लोक  13.163.d8 
नात्र देवि जरा मृत्यु: शोको वा दु:खमेव वा।
अनुत्तममचिन्त्यं च तद् देवि परमं सुखम्॥
 
 
अनुवाद
देवी! इसमें मृत्यु, शोक या संताप नहीं है। वह सर्वोत्तम अकल्पनीय परम सुख है।
 
Goddess! There is no death, grief or sorrow in it. That best unimaginable supreme happiness.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)