Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.163.d65: कामना के समान कोई दुःख नहीं है, त्याग के समान कोई सुख नहीं है। समस्त कामनाओं का त्याग करके मनुष्य ब्रह्मभाव को प्राप्त होता है।   |   mahabharat अध्याय 13.163: मोक्षधर्मकी श्रेष्ठताका प्रतिपादन, मोक्षसाधक ज्ञानकी प्राप्तिका उपाय और मोक्षकी प्राप्तिमें वैराग्यकी प्रधानता]   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 163: मोक्षधर्मकी श्रेष्ठताका प्रतिपादन, मोक्षसाधक ज्ञानकी प्राप्तिका उपाय और मोक्षकी प्राप्तिमें वैराग्यकी प्रधानता]  »  श्लोक d65
 
 
श्लोक  13.163.d65 
नास्ति तृष्णासमं दु:खं नास्ति त्यागसमं सुखम्।
सर्वान् कामान् परित्यज्य ब्रह्मभूयाय कल्पते॥
 
 
अनुवाद
कामना के समान कोई दुःख नहीं है, त्याग के समान कोई सुख नहीं है। समस्त कामनाओं का त्याग करके मनुष्य ब्रह्मभाव को प्राप्त होता है।
 
There is no sorrow like desire, there is no happiness like renunciation. By renouncing all desires, a man attains Brahmabhaav.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)