श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 163: मोक्षधर्मकी श्रेष्ठताका प्रतिपादन, मोक्षसाधक ज्ञानकी प्राप्तिका उपाय और मोक्षकी प्राप्तिमें वैराग्यकी प्रधानता]  »  श्लोक d6
 
 
श्लोक  13.163.d6 
शृणु देवि समासेन मोक्षद्वारमनुत्तमम्।
एतद्धि सर्वधर्माणां विशिष्टं शुभमव्ययम्॥
 
 
अनुवाद
देवि! अब मोक्ष के सर्वोत्तम द्वार का संक्षिप्त वर्णन सुनो। यह सभी धर्मों में श्रेष्ठ, मंगलमय और अविनाशी है।
 
Devi! Now listen to the brief description of the best door to salvation. This is the best, auspicious and indestructible among all religions.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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