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mahabharat 13.163.d55: धन का अर्जन महान दुःख है और दरिद्रता परम सुख है; क्योंकि जब धन का अहित होता है, तो निश्चय ही महान दुःख होता है।   |   mahabharat अध्याय 13.163: मोक्षधर्मकी श्रेष्ठताका प्रतिपादन, मोक्षसाधक ज्ञानकी प्राप्तिका उपाय और मोक्षकी प्राप्तिमें वैराग्यकी प्रधानता]   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.163.d55 
अर्थप्राप्तिर्महद् दु:खमाकिंचन्यं परं सुखम्।
उपद्रवेषु चार्थानां दु:खं हि नियतं भवेत्॥
 
 
अनुवाद
धन का अर्जन महान दुःख है और दरिद्रता परम सुख है; क्योंकि जब धन का अहित होता है, तो निश्चय ही महान दुःख होता है।
 
Acquisition of wealth is a great sorrow and poverty is the ultimate happiness; because when wealth is troubled, it is certainly a great sorrow.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)