Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.163.d53-d54: धनवान व्यक्ति पर सदैव पाँच शत्रु आक्रमण करते हैं - राजा, चोर, उत्तराधिकारी, भाई, अन्य प्राणी और क्षय। प्रिये! इस प्रकार तुम अर्थ को ही विपत्ति का मूल समझते हो। धनहीन मनुष्य के साथ दुर्भाग्य नहीं होता। | mahabharat अध्याय 13.163: मोक्षधर्मकी श्रेष्ठताका प्रतिपादन, मोक्षसाधक ज्ञानकी प्राप्तिका उपाय और मोक्षकी प्राप्तिमें वैराग्यकी प्रधानता] । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अर्थवन्तं नरं नित्यं पञ्चाभिघ्नन्ति शत्रव:।
राजा चोरश्च दायादा भूतानि क्षय एव च॥
अर्थमेवमनर्थस्य मूलमित्यवधारय।
न ह्यनर्था: प्रबाधन्ते नरमर्थविवर्जितम्॥
अनुवाद
धनवान व्यक्ति पर सदैव पाँच शत्रु आक्रमण करते हैं - राजा, चोर, उत्तराधिकारी, भाई, अन्य प्राणी और क्षय। प्रिये! इस प्रकार तुम अर्थ को ही विपत्ति का मूल समझते हो। धनहीन मनुष्य के साथ दुर्भाग्य नहीं होता।
A rich man is always attacked by five enemies – the king, thieves, heirs, brothers, other creatures and decay. Darling! In this way you understand meaning as the root of disaster. Misfortunes do not hinder a man without money.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥