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mahabharat 13.163.d5: शुचिस्मिते! जो मनुष्य जिस विषय में निश्चय प्राप्त कर लेता है, वह उसी को धर्म मानता है, अन्य किसी वस्तु को नहीं।   |   mahabharat अध्याय 13.163: मोक्षधर्मकी श्रेष्ठताका प्रतिपादन, मोक्षसाधक ज्ञानकी प्राप्तिका उपाय और मोक्षकी प्राप्तिमें वैराग्यकी प्रधानता]   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.163.d5 
यस्मिन् यस्मिंश्च विषये यो यो याति विनिश्चयम्।
तं तमेवाभिजानाति नान्यं धर्मं शुचिस्मिते॥
 
 
अनुवाद
शुचिस्मिते! जो मनुष्य जिस विषय में निश्चय प्राप्त कर लेता है, वह उसी को धर्म मानता है, अन्य किसी वस्तु को नहीं।
 
Shuchismite! Whoever attains certainty in whatever subject, he considers only that as Dharma and not anything else.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)