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mahabharat 13.163.d43: यदि इनमें से कोई भी एक मार्ग मिल जाए तो इस मनुष्य को सुख मिलने पर प्रसन्न नहीं होना चाहिए और दुःख मिलने पर चिंतित नहीं होना चाहिए।   |   mahabharat अध्याय 13.163: मोक्षधर्मकी श्रेष्ठताका प्रतिपादन, मोक्षसाधक ज्ञानकी प्राप्तिका उपाय और मोक्षकी प्राप्तिमें वैराग्यकी प्रधानता]   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.163.d43 
तयोरेकतरो मार्गो यद्येनमभिसंनमेत्।
सुखं प्राप्य न संहृष्येन्न दु:खं प्राप्य संज्वरेत् ॥
 
 
अनुवाद
यदि इनमें से कोई भी एक मार्ग मिल जाए तो इस मनुष्य को सुख मिलने पर प्रसन्न नहीं होना चाहिए और दुःख मिलने पर चिंतित नहीं होना चाहिए।
 
If he gets any one of these ways, then this man should not be happy on getting happiness and should not be worried on getting sadness.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)