Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.163.d38: यदि धन नष्ट हो जाए अथवा स्त्री, पुत्र या पिता की मृत्यु हो जाए, तो 'हाय! मुझ पर बड़ा दुःख आ पड़ा' ऐसा सोचकर मनुष्य शोक का आश्रय लेता है।   |   mahabharat अध्याय 13.163: मोक्षधर्मकी श्रेष्ठताका प्रतिपादन, मोक्षसाधक ज्ञानकी प्राप्तिका उपाय और मोक्षकी प्राप्तिमें वैराग्यकी प्रधानता]   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 163: मोक्षधर्मकी श्रेष्ठताका प्रतिपादन, मोक्षसाधक ज्ञानकी प्राप्तिका उपाय और मोक्षकी प्राप्तिमें वैराग्यकी प्रधानता]  »  श्लोक d38
 
 
श्लोक  13.163.d38 
नष्टे धने वा दारे वा पुत्रे पितरि वा मृते।
अहो दु:खमिति ध्यायन् शोकस्य पदमाव्रजेत् ॥
 
 
अनुवाद
यदि धन नष्ट हो जाए अथवा स्त्री, पुत्र या पिता की मृत्यु हो जाए, तो 'हाय! मुझ पर बड़ा दुःख आ पड़ा' ऐसा सोचकर मनुष्य शोक का आश्रय लेता है।
 
If wealth is lost or if the wife, son or father dies, then thinking, 'Oh! A great sorrow has fallen on me,' the man takes refuge in grief.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)