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mahabharat 13.163.d30: उसे सभी पापों से दूर रहना चाहिए, हल्का भोजन करना चाहिए, अपनी इंद्रियों को वश में रखना चाहिए और ईश्वर के चिंतन में लीन रहना चाहिए। इससे उसे श्रेष्ठ बुद्धि प्राप्त होती है जो पापों का नाश करती है।   |   mahabharat अध्याय 13.163: मोक्षधर्मकी श्रेष्ठताका प्रतिपादन, मोक्षसाधक ज्ञानकी प्राप्तिका उपाय और मोक्षकी प्राप्तिमें वैराग्यकी प्रधानता]   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.163.d30 
विमुक्त: सर्वपापेभ्यो लघ्वाहारो जितेन्द्रिय:।
आत्मयुक्त: परां बुद्धिं लभते पापनाशिनीम्॥
 
 
अनुवाद
उसे सभी पापों से दूर रहना चाहिए, हल्का भोजन करना चाहिए, अपनी इंद्रियों को वश में रखना चाहिए और ईश्वर के चिंतन में लीन रहना चाहिए। इससे उसे श्रेष्ठ बुद्धि प्राप्त होती है जो पापों का नाश करती है।
 
He should stay away from all sins, eat light food, keep his senses under control and remain engaged in contemplation of God. Due to this, he gets superior intelligence which destroys sins.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)