श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 163: मोक्षधर्मकी श्रेष्ठताका प्रतिपादन, मोक्षसाधक ज्ञानकी प्राप्तिका उपाय और मोक्षकी प्राप्तिमें वैराग्यकी प्रधानता]  »  श्लोक d2
 
 
श्लोक  13.163.d2 
नारद उवाच
एवं पृष्टस्त्वया देव्या महादेव: पिनाकधृक्।
प्रोवाच मधुरं वाक्यं सूक्ष्ममध्यात्मसंश्रितम्॥
 
 
अनुवाद
नारदजी बोले - देवी पार्वती के इस प्रश्न पर पिनाकधारी महादेवजी ने सूक्ष्म आध्यात्मिकता से परिपूर्ण मधुर वाणी में यह बात कही।
 
Naradji said - On this question of Goddess Parvati, Pinakdhari Mahadevji said this in a sweet voice full of subtle spirituality.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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