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श्लोक 13.163.d2  |
नारद उवाच
एवं पृष्टस्त्वया देव्या महादेव: पिनाकधृक्।
प्रोवाच मधुरं वाक्यं सूक्ष्ममध्यात्मसंश्रितम्॥ |
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| अनुवाद |
| नारदजी बोले - देवी पार्वती के इस प्रश्न पर पिनाकधारी महादेवजी ने सूक्ष्म आध्यात्मिकता से परिपूर्ण मधुर वाणी में यह बात कही। |
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| Naradji said - On this question of Goddess Parvati, Pinakdhari Mahadevji said this in a sweet voice full of subtle spirituality. |
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